घुटने का दर्द किसी भी उम्र में हो सकता है और यह चोट, संक्रमण, टेंडोनाइटिस या गठिया जैसी चिकित्सीय स्थितियों के कारण होता है। दर्द हल्का भी हो सकता है और इतना गंभीर भी कि चलना-फिरना मुश्किल हो जाए। सही कारण की पहचान और समय पर इलाज से जटिलताओं से बचा जा सकता है।
घुटने के दर्द के मुख्य कारण
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चोट: लिगामेंट (ACL, MCL), मेनिस्कस, टेंडन या हड्डी (पटेला) में चोट
- टेंडोनाइटिस: बार-बार उपयोग से टेंडन में सूजन
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गठिया (Arthritis): उपास्थि के घिसने से दर्द, अकड़न और सूजन
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बर्साइटिस: जोड़ के पास तरल-भरी थैलियों की सूजन
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संक्रमण: बैक्टीरिया या सूजनजन्य गठिया से जोड़ों में दर्द और बुखार
जोखिम कारक
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पहले घुटने में चोट
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मोटापा
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बिना वार्म-अप के खेल या व्यायाम
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मांसपेशियों की कमजोरी व गतिहीन जीवनशैली
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गलत फिटिंग के जूते
सामान्य लक्षण
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चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने या मोड़ने पर दर्द
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सूजन, लालिमा और गर्माहट
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अकड़न या घुटना जाम होना
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कटकने/चटकने की आवाज़
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अस्थिरता या पैर सीधा न हो पाना
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बुखार (संक्रमण में)
निदान (Diagnosis)
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शारीरिक परीक्षण: मूवमेंट और स्थिरता का आकलन
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एक्स-रे: हड्डी, फ्रैक्चर या गठिया की जांच
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MRI/अल्ट्रासाउंड: लिगामेंट, मेनिस्कस व सॉफ्ट टिश्यू की चोट
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रक्त परीक्षण: संक्रमण या रुमेटी गठिया की पुष्टि
उपचार (Treatment)
दर्द के कारण और गंभीरता के अनुसार इलाज चुना जाता है:
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दवाइयाँ: दर्द निवारक, NSAIDs, एंटीबायोटिक्स (संक्रमण में)
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इंजेक्शन: हाइल्यूरोनिक एसिड, कॉर्टिसोन
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फिजियोथेरेपी: मांसपेशियाँ मजबूत करने और मूवमेंट सुधारने के लिए
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आर्थ्रोसेंटेसिस: जोड़ से तरल निकालकर राहत और जांच
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सर्जरी: गंभीर चोट या एडवांस गठिया में आर्थ्रोस्कोपी या घुटना प्रत्यारोपण
व्यायाम और वजन नियंत्रण
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क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और ग्लूट्स को मजबूत करने वाले व्यायाम
- वॉकिंग, साइक्लिंग, स्विमिंग जैसे लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज़
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वजन कम करने से घुटनों पर दबाव घटता है; 1 किलो वजन कम होने पर घुटनों पर पड़ने वाला भार कई गुना कम हो सकता है
डॉक्टर से कब मिलें?
- लगातार या बढ़ता हुआ दर्द
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सूजन, लालिमा और बुखार
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घुटने की अस्थिरता या लॉक होना
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क्लिक/पॉप की आवाज़ के साथ दर्द
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पैर पूरा सीधा या मोड़ न पाना
निष्कर्ष:
घुटने का दर्द चोट, गठिया, सूजन या संक्रमण से हो सकता है। सही जांच (एक्स-रे, MRI) और कारण-आधारित उपचार (दवाइयाँ, फिजियोथेरेपी, इंजेक्शन या सर्जरी) से दर्द नियंत्रित किया जा सकता है और जोड़ों की कार्यक्षमता सुधारी जा सकती है। समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे बेहतर उपाय है।
